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ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र: Official ₹661.5 करोड़ की नई नौसेना डील

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र से जुड़ी दो बड़ी खबरें एक साथ आई हैं, 6 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना के लिए ₹661.5 करोड़ का नया सौदा हुआ है, और इसी हफ्ते ब्रह्मोस का कुल निर्यात 60 करोड़ डॉलर के पार जाने की बात सामने आई है।

ब्रह्मोस एक्सपोर्ट फिलीपींस इंडोनेशिया वियतनाम मैप | NovaKhabar

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र के लिए नई नौसेना डील क्या है?

रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को BrahMos Aerospace के साथ ₹661.5 करोड़ का समझौता किया है, जिसके तहत भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदे जाएंगे।

यह सौदा Buy (Indian-IDDM) श्रेणी के तहत हुआ है, जो पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और विकसित रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इसका मकसद है साल 2030 तक नौसेना के लगभग सभी युद्धपोतों में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह से जोड़ना, यानी यह एक अकेला सौदा नहीं बल्कि एक लंबी, योजनाबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा है।

ब्रह्मोस एक्सपोर्ट 60 करोड़ डॉलर को पार क्यों कर रहा है?

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र अब भारत के रक्षा निर्यात की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक बन चुका है, रक्षा सचिव के मुताबिक इसका कुल निर्यात जल्द ही 60 करोड़ डॉलर को पार कर जाएगा।

ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम लॉन्चर | NovaKhabar

IndianDefenseNews की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों, फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ ब्रह्मोस को लेकर समझौते या डील सुनिश्चित की हैं। यह सिर्फ एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता के वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए जाने का भी संकेत है।

फिलीपींस को ब्रह्मोस की डिलीवरी की क्या स्थिति है?

फिलीपींस भारत से ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र खरीदने वाला पहला देश था, और अब तक वहां लगभग 33 करोड़ डॉलर के ब्रह्मोस सिस्टम डिलीवर किए जा चुके हैं, कुल सौदा लगभग 37.4 करोड़ डॉलर का था।

फिलीपींस की मरीन कोर अब दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपनी ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल बैटरी को पूरी तरह चालू करने में जुटी है। कम से कम एक बैटरी पहले से ही सक्रिय है, जिसमें दो लॉन्चर, एक मोबाइल सर्फेस सर्च रडार, एक रीलोडिंग व्हीकल और एक कमांड एंड कंट्रोल स्टेशन शामिल हैं।

इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ ब्रह्मोस डील कहां तक पहुंची है?

इंडोनेशिया ने 9 मार्च 2026 को भारत के साथ ब्रह्मोस खरीदने के समझौते की पुष्टि की थी, जिसकी कीमत लगभग 20 करोड़ डॉलर आंकी जा रही है।

वियतनाम के साथ डील अभी अंतिम मंज़ूरियों के इंतज़ार में है, कंपनी के सीईओ के मुताबिक यह समझौता पूरा होने के बहुत करीब है, और इससे शुरुआती निर्यात करीब 10 करोड़ डॉलर का होने का अनुमान है। तीनों देशों के साथ मिलाकर ही ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र का कुल निर्यात आंकड़ा 60 करोड़ डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद है।

ब्रह्मोस का उत्पादन कितना बढ़ रहा है?

घरेलू मांग और बढ़ते निर्यात ऑर्डर, दोनों को पूरा करने के लिए ब्रह्मोस का सालाना उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है।

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र नौसेना डील जानकारी | NovaKhabar

2026 से उत्पादन क्षमता सालाना 80 से 100 यूनिट तक पहुंच जाएगी, और आने वाले समय में BrahMos-NG वेरिएंट के लिए इसे 100 से 150 यूनिट तक और बढ़ाने की योजना है। यह बढ़ोतरी इसलिए ज़रूरी है क्योंकि भारतीय नौसेना की अपनी मांग, जैसे अभी हुआ ₹661.5 करोड़ का सौदा, और विदेशी ऑर्डर, दोनों एक साथ बढ़ रहे हैं।

ब्रह्मोस-NG और भविष्य के वेरिएंट क्या हैं?

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र का अगला बड़ा कदम है BrahMos-NG, यानी नेक्स्ट जेनरेशन वर्जन, जो मौजूदा मिसाइल से हल्का और छोटा होगा ताकि इसे ज़्यादा लड़ाकू विमानों और जहाज़ों पर तैनात किया जा सके।

इसके साथ ही लंबी दूरी तक मार करने वाले वेरिएंट पर भी काम चल रहा है, और कंपोजिट मटीरियल का इस्तेमाल करके मिसाइल को और हल्का बनाने पर शोध जारी है। ज़्यादा रक्षा से जुड़ी खबरों के लिए हमारा National सेक्शन देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र किन देशों ने मिलकर बनाया है?
ब्रह्मोस भारत और रूस के बीच एक संयुक्त उद्यम है, जिसे BrahMos Aerospace नाम की कंपनी बनाती है।

क्या ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है?
हां, ब्रह्मोस को सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल माना जाता है, जो ध्वनि की गति से कई गुना तेज़ उड़ान भर सकती है।

क्या ब्रह्मोस सिर्फ नौसेना के लिए बनाई गई है?
नहीं, ब्रह्मोस को थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के लिए अलग-अलग वर्जन में तैयार किया गया है।

क्या फिलीपींस के अलावा और देश भी ब्रह्मोस का इस्तेमाल कर रहे हैं?
अभी फिलीपींस ही एकमात्र देश है जहां ब्रह्मोस डिलीवर और तैनात हो चुकी है, इंडोनेशिया और वियतनाम की डील अभी प्रक्रिया में हैं।

₹661.5 करोड़ की नई डील में सिर्फ मिसाइल खरीदी जा रही है?
नहीं, इस सौदे में मिसाइल के साथ फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर भी शामिल हैं, जो नौसेना के जहाज़ों पर ब्रह्मोस को तैनात करने के लिए ज़रूरी तकनीकी ढांचा हैं।

Sanoj Kumar

I’m Sanoj Pandit, a writer and the creator of NovaKhabar. I have a strong interest in technology, business, finance, current affairs, sports, and trending stories. I like exploring what’s happening, researching the details behind a story, and presenting it in a way that is simple and useful for readers. NovaKhabar is my space to share the stories and topics I find interesting while helping readers stay informed.

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