National

निर्वाचन आयोग: Official 13.3 करोड़ नाम हटाने पर विवाद तेज़

निर्वाचन आयोग की वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया (SIR) के तहत अब तक लगभग 13.3 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है और सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है।

निर्वाचन आयोग SIR वोटर लिस्ट विवाद | NovaKhabar

निर्वाचन आयोग का SIR अभियान क्या है?

निर्वाचन आयोग Special Intensive Revision (SIR) नाम से देशभर में वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा करवा रहा है, जिसका मकसद गलत, डुप्लीकेट या पुराने नामों को लिस्ट से हटाना है।

यह एक बड़े पैमाने की प्रक्रिया है जिसमें बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं। उत्तराखंड जैसे कुछ राज्यों में SIR के बाद अंतिम वोटर लिस्ट भी प्रकाशित हो चुकी है, जहां 3 अक्टूबर 2026 को 71,58,949 मतदाताओं की सूची जारी की गई।

13.3 करोड़ नाम क्यों हटाए गए?

निर्वाचन आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में सबसे बड़ा हिस्सा, करीब 9.5 करोड़ यानी 71% से ज़्यादा नाम, “अनुपस्थित, स्थानांतरित या अन्य” श्रेणी में आते हैं।

इसके अलावा लगभग 2.7 करोड़ नाम, यानी 20% से कुछ ज़्यादा, मृत्यु की वजह से हटाए गए, जबकि करीब 1.01 करोड़ नाम, यानी 7.6%, एक ही व्यक्ति की एक से ज़्यादा एंट्री होने के कारण हटाए गए। निर्वाचन आयोग ने 29 सितंबर को लिखित निर्देश जारी किया था, जिसे अक्टूबर की शुरुआत में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में दोबारा दोहराया गया, कि जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है वहां छूटे हुए पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

अगर आपका नाम वोटर लिस्ट से हट गया है तो क्या करें?

सबसे पहले अपने EPIC नंबर से आधिकारिक वोटर पोर्टल पर स्टेटस चेक करें, अगर EPIC नंबर से जानकारी न मिले तो नाम और पिता या पति के नाम से भी खोजा जा सकता है।

अगर नाम पिछले 15 दिनों के भीतर हटाया गया है, तो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 24 के तहत ज़िला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के पास अपील दायर की जा सकती है। अगर 15 दिन से ज़्यादा समय बीत चुका है, तो Form 6 भरकर नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा। निर्वाचन आयोग ने उन सभी राज्यों में जहां SIR पूरा हो चुका है, बूथ लेवल अधिकारियों को घर-घर जाकर पात्र लेकिन छूटे हुए मतदाताओं को Form 6 के ज़रिए दोबारा जोड़ने का निर्देश दिया है।

विपक्ष निर्वाचन आयोग पर क्या आरोप लगा रहा है?

विपक्षी दलों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, और बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से असली पात्र मतदाता भी सूची से बाहर हो सकते हैं।

वोटर लिस्ट नाम हटाने का कारण चार्ट | NovaKhabar

9 अक्टूबर 2026 को दस विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। TimesNow हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अक्टूबर को असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में उपचुनावों के लिए मतदान के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन ने इन कथित अनियमितताओं के खिलाफ मार्च निकालने की भी योजना बनाई थी। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये आरोप अभी तक अदालत में साबित नहीं हुए हैं, और निर्वाचन आयोग इन्हें स्वीकार नहीं करता।

सुप्रीम कोर्ट में CEC को लेकर क्या मामला चल रहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कई बड़े प्रशासनिक फैसले, दिशा-निर्देश और तकनीकी बदलाव मुख्य चुनाव आयुक्त ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना ही लागू कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार किया है और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है, यानी यह मामला अभी सुनवाई के दौर में है, इसका अंतिम फैसला आना बाकी है।

निर्वाचन आयोग का इस पर क्या कहना है?

निर्वाचन आयोग का रुख रहा है कि वह हटाए गए मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक करने या हर नाम हटाने का अलग से कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है।

आयोग का कहना है कि SIR एक नियमित, वैधानिक प्रक्रिया है जिसका मकसद वोटर लिस्ट को सटीक बनाना है, न कि किसी को जानबूझकर मतदान के अधिकार से वंचित करना। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि छूटे हुए पात्र मतदाताओं को वापस जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ज़्यादा राष्ट्रीय खबरों के लिए हमारा National सेक्शन देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

SIR का पूरा नाम क्या है?
SIR का मतलब है Special Intensive Revision, यानी वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा।

क्या SIR सिर्फ कुछ राज्यों में हो रहा है या पूरे देश में?
यह एक पैन-इंडिया यानी पूरे देश में चलने वाली प्रक्रिया है, हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसे पूरा करने की समयसीमा अलग-अलग रही है।

अगर Form 6 भरने के बाद भी नाम न जुड़े तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या ज़िला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से सीधे संपर्क करना चाहिए।

क्या हटाए गए सभी 13.3 करोड़ नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं?
नहीं, निर्वाचन आयोग के मुताबिक ज़्यादातर नाम मृत्यु, स्थानांतरण या डुप्लीकेट एंट्री जैसी वास्तविक वजहों से हटाए गए हैं, हालांकि विपक्ष का कहना है कि इनमें कुछ पात्र मतदाता भी शामिल हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम क्या होगा?
अभी तक कोई तारीख या अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं हुआ है, मामला सुनवाई के दौर में है और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा गया है।

Sanoj Kumar

I’m Sanoj Pandit, a writer and the creator of NovaKhabar. I have a strong interest in technology, business, finance, current affairs, sports, and trending stories. I like exploring what’s happening, researching the details behind a story, and presenting it in a way that is simple and useful for readers. NovaKhabar is my space to share the stories and topics I find interesting while helping readers stay informed.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *