
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त: Official नियुक्ति, कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का पद अभी ज्ञानेश कुमार के पास है, जो 19 फरवरी 2025 से इस पद पर हैं और 2023 के नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले CEC हैं।

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जिनका कैडर केरल है, और वे भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
उनका जन्म 27 जनवरी 1964 को आगरा, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है और हार्वर्ड सहित अन्य संस्थानों में आगे की पढ़ाई की है। केंद्र सरकार में उन्होंने रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय में अपर सचिव, और संसदीय कार्य मंत्रालय व सहकारिता मंत्रालय में सचिव जैसे अहम पद संभाले हैं। वे 15 मार्च 2024 को पहले चुनाव आयुक्त बने थे, और फरवरी 2025 में राजीव कुमार का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है?
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है, जिसमें प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, और लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता) शामिल होते हैं।

PRS India के विश्लेषण के मुताबिक, यह प्रक्रिया CEC और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत तय की गई है, जिसने सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल फैसले वाली अंतरिम व्यवस्था की जगह ली, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी शामिल थे। नए कानून में CJI को इस चयन समिति से हटा दिया गया है, जिस पर खुद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भी आपत्ति जताई थी।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल कितना होता है?
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह साल या 65 साल की उम्र तक, जो भी पहले हो, तय किया गया है।
वेतन और सेवा शर्तों को लेकर अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर है, कुछ इसे सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर बताते हैं, तो कुछ इसे कैबिनेट सचिव के स्तर के बराबर बताते हैं, इसलिए सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक अधिसूचना देखना बेहतर रहेगा। ज्ञानेश कुमार का मौजूदा कार्यकाल एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2029 तक बताया गया है, हालांकि यह तारीख सिर्फ एक ही स्रोत से मिली है, इसकी पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से की जानी चाहिए।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से कैसे हटाया जा सकता है?
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को सिर्फ उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है।
इसका मतलब है कि “सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता” के आधार पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पास कराना ज़रूरी होता है, सिर्फ सरकार या राष्ट्रपति का आदेश काफी नहीं है। अन्य चुनाव आयुक्तों को राष्ट्रपति सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर ही हटा सकते हैं। 2023 के कानून की धारा 16 के तहत, मौजूदा या पूर्व CEC और चुनाव आयुक्तों के आधिकारिक कामकाज को लेकर अदालतों में सिविल या आपराधिक कार्यवाही शुरू करने पर भी रोक लगाई गई है। आज तक भारत में किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस प्रक्रिया के तहत हटाया नहीं गया है।
अभी ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या विवाद चल रहा है?
मार्च 2026 में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दाखिल किया गया था, हालांकि यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में ही आगे नहीं बढ़ सका।
इसके अलावा, अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कई बड़े प्रशासनिक फैसले बाकी चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। इस मामले की पूरी जानकारी हमारी निर्वाचन आयोग से जुड़ी रिपोर्ट में दी गई है, जहां वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) से जुड़े व्यापक विवाद को भी कवर किया गया है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये सभी आरोप अभी तक अदालत में साबित नहीं हुए हैं, और यह प्रक्रिया अभी जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों में क्या फर्क है?
मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग के प्रमुख होते हैं, जबकि अन्य चुनाव आयुक्त उनके साथ मिलकर फैसले लेने वाले सदस्य होते हैं, अन्य आयुक्तों को हटाने का अधिकार सिर्फ CEC की सिफारिश पर राष्ट्रपति के पास होता है।
क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?
2023 के कानून के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों के आधिकारिक कामकाज को लेकर सीधे सिविल या आपराधिक कार्यवाही पर रोक है, हालांकि संवैधानिक अदालतें रिट याचिका जैसे अन्य कानूनी रास्तों से फैसलों की समीक्षा कर सकती हैं।
ज्ञानेश कुमार से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
ज्ञानेश कुमार से पहले राजीव कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिनका कार्यकाल फरवरी 2025 में पूरा हुआ।
क्या महाभियोग प्रस्ताव पास होना आसान है?
नहीं, संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए होता है, यही वजह है कि आज तक किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस तरीके से नहीं हटाया जा सका है।
