
अनुच्छेद 370: Official सुप्रीम कोर्ट फैसले पर फारूक अब्दुल्ला का जवाब
अनुच्छेद 370 एक बार फिर चर्चा में है, नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 19 अक्टूबर 2026 को इसे हटाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “गलत” बताया और राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए।

फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को अनुच्छेद 370 हटाए जाने को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले को “पूरी तरह गलत” बताया।
Tribune की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली और जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा अभी तक पूरा क्यों नहीं हुआ, और निर्वाचित सरकार व उपराज्यपाल के बीच अधिकारों के बंटवारे से जुड़े नियम अभी तक जारी क्यों नहीं हुए। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह फारूक अब्दुल्ला और उनकी पार्टी की राजनीतिक राय है, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट का रुख इससे अलग है।
अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का असली फैसला क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2023 को एक सर्वसम्मत फैसले में अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के 2019 के फैसले को संवैधानिक रूप से सही ठहराया था।
इसी फैसले में अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि जम्मू-कश्मीर में सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराए जाएं और राज्य का दर्जा “जल्द से जल्द” बहाल किया जाए। विधानसभा चुनाव तय समय पर हुए और अक्टूबर 2024 से उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री हैं, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा अभी तक बहाल नहीं हुआ है, यही वजह है कि फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता इसे “अधूरा वादा” बताते हैं।
जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों का विवाद क्या है?
जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास पुलिस, कानून-व्यवस्था, अभियोजन, जेल, भ्रष्टाचार-रोधी जांच, वित्त और बड़े अधिकारियों के तबादलों जैसे अहम विषयों पर सीधा अधिकार है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि इन शक्तियों की वजह से निर्वाचित सरकार का वास्तविक कामकाज बहुत सीमित हो गया है, जबकि उपराज्यपाल कार्यालय और केंद्र सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था मौजूदा कानूनी ढांचे के मुताबिक ही है। यह एक जारी राजनीतिक बहस है, जिसमें दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं, और इसका कोई एकतरफा सही या गलत जवाब नहीं है।
लद्दाख में अनुच्छेद 370 जैसी मांग का क्या हुआ?
लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद 370 जैसी ही कुछ सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा था, जिसमें कुछ संसदीय कानूनों को लद्दाख पर लागू न करने जैसी शर्तें शामिल थीं।
गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसे लद्दाख के इन समूहों ने असहमति बताया। लद्दाख प्रशासन के मुख्य सचिव आशीष कुंड्रा ने साफ कहा कि अनुच्छेद 370 को पहले ही निरस्त किया जा चुका है, इसलिए इसे दोबारा उठाने का कोई औचित्य नहीं बनता।
OIC के प्रस्ताव पर भारत की क्या प्रतिक्रिया थी?
इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के एक प्रस्ताव में कश्मीर का ज़िक्र किए जाने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं, और पाकिस्तान पर इस मंच का इस्तेमाल भारत विरोधी प्रचार के लिए करने का आरोप लगाया। ज़्यादा राष्ट्रीय खबरों के लिए हमारा National सेक्शन देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनुच्छेद 370 कब और किसने हटाया था?
केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में संवैधानिक रूप से सही ठहराया।
जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री कौन हैं?
उमर अब्दुल्ला अक्टूबर 2024 से जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं, और सुरिंदर कुमार चौधरी उप-मुख्यमंत्री हैं।
क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 पर दोबारा सुनवाई कर रहा है?
मौजूदा रिपोर्ट्स में अक्टूबर 2026 में अनुच्छेद 370 पर किसी नए सुप्रीम कोर्ट फैसले की पुष्टि नहीं मिलती, हालांकि राज्य के दर्जे से जुड़ी याचिकाएं अदालत में लंबित हैं।
क्या लद्दाख को भी जम्मू-कश्मीर जैसा विशेष दर्जा मिल सकता है?
फिलहाल गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद 370 जैसी किसी व्यवस्था के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, इसलिए निकट भविष्य में ऐसा होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
