
कर्मचारी भविष्य निधि: वेतन सीमा ₹25,000 करने का चौंकाने वाला बड़ा फैसला
कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सिर्फ पांच दिन पहले, 17 सितंबर 2026 को हुआ है, जब सरकार ने अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 12 साल में पहली बार 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी। इसके अलावा ब्याज दर, निकासी के नियम और बैलेंस चेक करने का तरीका भी हाल ही में बदला है, यहां पूरी और ताज़ा जानकारी दी गई है।

मुख्य बातें:
- कर्मचारी भविष्य निधि की अनिवार्य वेतन सीमा 17 सितंबर 2026 से 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है, इससे करीब 51 लाख नए कर्मचारी कवर होंगे।
- वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25% तय की गई है, यह लगातार तीसरा साल है जब यह दर बरकरार रही है।
- अक्टूबर 2025 में निकासी के 13 अलग-अलग कारणों को सिर्फ 3 श्रेणियों में मिला दिया गया, अब न्यूनतम सेवा अवधि सिर्फ 12 महीने है।
- बेरोजगारी की स्थिति में बचे हुए 25% हिस्से की निकासी के लिए अब 2 महीने की जगह 12 महीने इंतजार करना पड़ता है।
- अगस्त 2025 से UAN एक्टिवेशन सिर्फ UMANG ऐप और आधार फेस ऑथेंटिकेशन से ही हो रहा है, पुराना पोर्टल वाला तरीका बंद हो चुका है।
कर्मचारी भविष्य निधि क्या है और हाल ही में क्या बड़ा बदलाव हुआ?
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) एक अनिवार्य बचत योजना है जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों हर महीने एक तय हिस्सा जमा करते हैं, और हाल ही में इसकी सबसे बड़ी खबर वेतन सीमा में बदलाव रही है।
पीएम इंडिया की आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दी, और अगले ही दिन 17 सितंबर 2026 को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी हो गई। यह बदलाव 2014 के बाद पहली बार हुआ है, जब सीमा 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये की गई थी, यानी पूरे 12 साल बाद यह सीमा दोबारा बढ़ी है। इस फैसले से अनुमानित तौर पर करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी अब अनिवार्य रूप से EPF, पेंशन योजना और बीमा कवरेज के दायरे में आ जाएंगे।
कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज दर 2025-26 में कितनी है?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.25% तय की गई है, जो पिछले साल जितनी ही है, यानी यह लगातार तीसरा साल है जब यह दर नहीं बदली।
यह दर EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 239वीं बैठक में 2 मार्च 2026 को श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में तय हुई थी। newsonair.gov.in की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इसे 1 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया, और लगभग 34 करोड़ खातों में करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का ब्याज जुलाई के मध्य से चरणबद्ध तरीके से क्रेडिट होना शुरू हुआ। अगर आपका पैसा अभी तक पासबुक में नहीं दिख रहा, तो घबराने की जरूरत नहीं, यह क्रेडिटिंग सभी खातों में एक साथ नहीं होती।
कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान कैसे होता है?
कर्मचारी अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 12% हर महीने कर्मचारी भविष्य निधि में जमा करता है, और नियोक्ता भी बराबर 12% जमा करता है, लेकिन नियोक्ता के हिस्से का बंटवारा अलग तरीके से होता है।
नियोक्ता के 12% में से 8.33% पेंशन योजना (EPS-1995) में जाता है और बाकी 3.67% कर्मचारी भविष्य निधि में जमा होता है। नई 25,000 रुपये की वेतन सीमा का सीधा असर यह होगा कि पेंशन योजना में जाने वाली अधिकतम राशि भी 1,249.50 रुपये प्रति माह से बढ़कर करीब 2,082.50 रुपये प्रति माह हो जाएगी। 2022 के सुप्रीम कोर्ट के हायर वेज पेंशन फैसले से जुड़ा विशेष आवेदन विंडो जुलाई 2023 में ही बंद हो चुका है, इसलिए अब उस स्कीम के तहत नया आवेदन देना संभव नहीं है। अगर आप बिजनेस और कानूनी अनुपालन से जुड़ी दूसरी गाइड भी पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी होम-बेस्ड फूड बिजनेस के लिए FSSAI लाइसेंस वाली रिपोर्ट भी देख सकते हैं।

कर्मचारी भविष्य निधि का बैलेंस कैसे चेक करें?
कर्मचारी भविष्य निधि का बैलेंस चेक करने के चार आसान तरीके अभी भी काम कर रहे हैं, UMANG ऐप, EPFO का मेंबर पोर्टल, मिस्ड कॉल, और SMS सर्विस।
UMANG ऐप में Social Security सेक्शन में जाकर EPFO चुनें और पासबुक देखने के लिए UAN और OTP से लॉगिन करें। मेंबर पोर्टल पर UAN, पासवर्ड और कैप्चा डालकर पासबुक डाउनलोड की जा सकती है। बैलेंस जानने के लिए अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें, या 7738299899 पर SMS भेजें, दोनों ही तरीकों के लिए UAN का सक्रिय और KYC से जुड़ा होना जरूरी है। एक अहम बदलाव यह है कि अगस्त 2025 से नया UAN सिर्फ UMANG ऐप के जरिए आधार फेस ऑथेंटिकेशन से ही एक्टिवेट होता है, पुराने पोर्टल वाला तरीका बंद कर दिया गया है।
कर्मचारी भविष्य निधि निकालने के नए नियम क्या हैं?
अक्टूबर 2025 में कर्मचारी भविष्य निधि निकालने के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ, पुराने 13 अलग-अलग कारणों को अब सिर्फ 3 व्यापक श्रेणियों में मिला दिया गया है, जरूरी जरूरतें, आवास जरूरतें, और विशेष परिस्थितियां।
ट्रिब्यून इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 238वीं बैठक में 13 अक्टूबर 2025 को लिया गया। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब हर श्रेणी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि सिर्फ 12 महीने कर दी गई है, जबकि पहले शादी और शिक्षा के लिए 7 साल और घर के लिए 5 साल तक इंतजार करना पड़ता था। अब खाते से 100% तक निकासी संभव है, बस अंतिम सेटलमेंट को छोड़कर हर बार कम से कम 25% बैलेंस खाते में बचा रहना जरूरी है। शादी के लिए अब 5 बार और शिक्षा के लिए 10 बार तक एडवांस लिया जा सकता है, जो पहले की सीमा से कहीं ज्यादा है।
एक बदलाव जो बहुत से लोगों को पुरानी जानकारी की वजह से चौंका सकता है, वह यह है कि बेरोजगारी की स्थिति में बचे हुए 25% हिस्से की निकासी के लिए अब सिर्फ 2 महीने नहीं, बल्कि 12 महीने की लगातार बेरोजगारी जरूरी है। रिटायरमेंट से जुड़ी निकासी अभी भी 58 साल की उम्र पर ही होती है, और 57 साल की उम्र से बैलेंस का 90% तक पहले निकाला जा सकता है।
कर्मचारी भविष्य निधि पर टैक्स के नियम क्या हैं?
अगर कर्मचारी भविष्य निधि से पैसा 5 साल से ज्यादा लगातार सेवा के बाद निकाला जाए, तो यह इनकम टैक्स की धारा 10(12) के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, भले ही बीच में नौकरी बदली गई हो, बशर्ते एक ही UAN से खाता ट्रांसफर हुआ हो।
अगर निकासी 5 साल से पहले की जाती है और रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो PAN दिए जाने पर 10% और PAN न देने पर 20% TDS काटा जाता है। 50,000 रुपये से कम की निकासी पर आमतौर पर TDS नहीं काटा जाता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह रकम टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर है, अगर वह 5 साल की छूट की शर्त पूरी नहीं करती तो उसे ITR में दिखाना जरूरी हो सकता है। अगर आप टैक्स से जुड़ी दूसरी जानकारी भी ढूंढ रहे हैं, तो हमारी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़ी रिपोर्ट भी एक बार देखें।
कर्मचारी भविष्य निधि और पेंशन योजना (EPS) में क्या अंतर है?
कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) अलग-अलग हैं, नियोक्ता के योगदान का 8.33% हिस्सा EPS में जाता है जबकि कर्मचारी का पूरा 12% सिर्फ EPF में ही जमा होता है, EPS में कभी नहीं।
मासिक पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की पात्र सेवा जरूरी है, इससे कम सेवा होने पर मासिक पेंशन की जगह एकमुश्त निकासी लाभ मिलता है। मौजूदा न्यूनतम मासिक पेंशन अभी भी 1,000 रुपये है, जो 2014 से नहीं बदली, हालांकि पेंशनभोगी लगातार इसे बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। यह सिर्फ एक मांग है, अभी तक इस बढ़ोतरी को सरकार ने मंजूरी नहीं दी है, इसलिए किसी भी जगह “जनवरी 2026 से 7,500 रुपये पेंशन” जैसी खबर दिखे तो उसे पुष्ट तथ्य न मानें। हमारी पुरानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की नई योजना 2026 वाली रिपोर्ट में संगठन से जुड़े और बदलावों की जानकारी मिलेगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कर्मचारी भविष्य निधि की वेतन सीमा कब और कितनी बढ़ाई गई?
17 सितंबर 2026 से यह सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है, यह 12 साल में पहला बदलाव है।
कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज दर कब खाते में आती है?
वित्त वर्ष 2025-26 की 8.25% ब्याज दर जुलाई 2026 के मध्य से चरणबद्ध तरीके से खातों में क्रेडिट होनी शुरू हुई।
क्या कर्मचारी भविष्य निधि से 100% पैसा निकाला जा सकता है?
हां, अक्टूबर 2025 के नए नियमों के तहत अधिकतर मामलों में 100% तक निकासी संभव है, बस अंतिम सेटलमेंट को छोड़कर हर बार कम से कम 25% बैलेंस बचाना जरूरी है।
UAN एक्टिवेट करने का तरीका बदला है क्या?
हां, अगस्त 2025 से नया UAN सिर्फ UMANG ऐप और आधार फेस ऑथेंटिकेशन से ही एक्टिवेट होता है, पुराना पोर्टल वाला तरीका बंद हो चुका है।
क्या EPS की न्यूनतम पेंशन बढ़कर 7,500 रुपये हो गई है?
नहीं, यह अभी सिर्फ एक मांग है, न्यूनतम पेंशन अभी भी 1,000 रुपये प्रति माह ही है।
